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भविष्य मालिकाअनजान बीमारी का कोई निदान नहीं होगा केवल भगवान् की शरण में ही उद्धार होगा

इस वीडियो में पंडित काशीनाथ जी ने बताया है कि महापुरुष अच्युतानंद जी ने भविष्य मालिका में वर्णन किया है,कि जब महाप्रभु कल्कि धर्म संस्थापना करेंगे । तब कई तरह से धर्म संस्थापना होगा जैसे जल…

भविष्य मालिकाकिस पाप के कारण कलियुग का अंत हुआ

इस वीडियो में पंडित काशीनाथ जी ने बताया है कि कैसे कलयुग की आयु से कम होकर 5000 वर्ष हो जाएगी,भविष्य मालिका के अनुसार इसका कारण है 35 प्रकार के पाप जो कलयुग के लोग कर रहे हैं। इसमें एक पाप …

भागवत महापुराणयमुना और श्रीकृष्णपत्नियों का संवाद, कीर्तनोत्सव में उद्धव जी का प्रकट होना

{श्रीमद्भागवत माहात्म्य} [द्वितीय अध्याय] ऋषियों ने पूछा:- सूत जी! अब यह बतलाइये कि परीक्षित और वज्रनाभ को इस प्रकार आदेश देकर जब शाण्डिल्य मुनि अपने आश्रम को लौट गये, तब उन दोनों राजाओं ने…

भागवत महापुराणपरीक्षित और वज्रनाभ का समागम, शाण्डिल्य जी के मुख से भगवान की लीला के रहस्य और व्रजभूमि के महत्त्व का वर्णन

[श्रीमद्भागवत माहात्म्य] {प्रथम अध्याय} महर्षि व्यास कहते हैं- जिनका स्वरूप है सच्चिदानन्दघन, जो अपने सौन्दर्य और माधुर्यादि गुणों से सबका मन अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं और सदा-सर्वदा अनन्त…

भागवत महापुराणश्री मद्भागवत महापुराण का संक्षिप्त वर्णन

श्री मद्भागवत महापुराण का संक्षिप्त वर्णन नारद जी की प्रेरणा से वेद व्यास जी ने श्रीमद् भागवत (Shrimad Bhagwat) ग्रन्थ लिखा है। श्रीमद् भागवत में 335 अध्याय हैं। यह व्यास जी द्वारा 18 पुराण…

भविष्य मालिकाकलियुग के पूर्ण होने के संबंध में श्री जगन्नाथ के क्षेत्र से मिले संकेत

महात्मा पंचसखाओ ने भविष्य मालिका की रचना भगवान निराकार जगन्नाथ जी के निर्देश से की थी। भविष्य मालिका में मुख्य रूप से कलियुग के अंत के विषय में सामाजिक, भौतिक और भौगोलिक परिवर्तनों के लक्षण…

भविष्य मालिकाभगवान कल्कि के अवतार से संबंधित विभिन्न शास्त्र पुराण और भविष्य मालिका में वर्णन

शास्त्रीय मत के अनुसार, भगवान के दसवें अवतार या कल्कि अवतार “संबल के गाँव में” जन्म लेंगे। यह तथ्य का उल्लेख, श्रीमद् भागवत, श्रीमद् महाभारत, कल्कि पुराण और पंच सखा कृत्य भविष्य मालिका में …

भविष्य मालिकाकलियुग में भगवान के तीन अवतार होंगे

पंच सखाओं द्वारा लिखित भविष्य मालिका ग्रंथ के अनुसार, कलियुग में, भगवान के तीन अवतार इस धरा धाम में अवतीर्ण होंगे। महापुरुष अच्युतानंद जी ने “जाई फूल मलिका” पुस्तक में लिखा है:- "कलि रे तीन…

त्रि संध्यागीत गोविन्द-जय देव कृत

**गीत गोविन्द-जय देव कृत**   श्रितकमलाकुच मण्डल धृतकुण्डल ए। कलितललित वनमाल जय जय देव हरे॥ दिनमणिमण्डल मण्डन भवखण्डन ए। मुनिजनमानस हंस जय जय देव हरे ॥ कालियविषधर गंजन जनरंजन ए। यदुकुलन…

भविष्य मालिकाम्लेच्छ किसे कहते हैं ?

सत्ययुग में भगवन विष्णु ने अवतार ले के संसार में सत्य, शांति, दया, क्षमा और मैत्री की स्थापन की थी । उस समय सभी शास्त्रों के ज्ञाता थे और सभी वैदिक परम्परा के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे थे। …

भविष्य मालिकाकलियुग के अंत होने का लक्षण

कलियुग का अंत हो चुका है और इस तथ्य को प्रमाणित करने के लिए महापुरुष पंचसखाओं ने भविष्य मालिका ग्रंथों में स्पष्ट रूप से बहुत से लक्षणों को वर्णित किया है :- (क) मनुष्य सभ्यता में आने वाले …

भविष्य मालिकाधर्म संस्थापना के लिए भगवान विष्णु जी के दशावतार

श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है - “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥४-७॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । ध…

भविष्य मालिकाकौन-कौन से पाप द्वारा कलियुग का पतन होगा?

कलियुग की चतुर्युग गणना के अनुसार 4,32,000 वर्ष भोग होना चाहिए। परंतु मनुष्य कृत पाप कर्मों की कारण, कलि युग की आयु का क्षय होता है। इस कलियुग की आयु भविष्य मालिका ग्रंथ के अनुसार जिन 35 प्…

भविष्य मालिकाचतुर्युग गणना के संबंध में विचार

ब्रह्माण्ड तत्व के अनुसार संसार में क्रमशः चार युग का भोग होता है। उन चार युगों के नाम हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। सतयुग में धर्म के चार पग होते हैं एवं उसकी आयु 17,68,000 व…

भविष्य मालिकाभविष्य मालिका ग्रंथ के रचयिता कौन हैं ?

सत, त्रेता, द्वापर और कलियुग, इन चार युगों में भगवान के पंचसखा इस धरती पर जन्म लेते हैं। युग के अंत में, भगवान विष्णु के धर्म संस्थापना के कार्य में, पंचसखा अपना सहयोग प्रदान करते हैं। स्वक…

भविष्य मालिकाकलियुग के अंत समय में भविष्य मालिका की आवश्यकता

युग चक्र के अनुसार पहला सतयुग, दूसरा त्रेतायुग, तीसरा द्वापरयुग और आखिर में कलियुग का आगमन होता है। वर्तमान समय में कलियुग की सम्पूर्ण आयु समाप्त हो चुकी है और युग संध्या काल चल रहा है। कोई…

भविष्य मालिकासम्पूर्ण विश्व के मानव समाज के उद्धार के लिए नितांत आवश्यक है

कलियुग का अंत हो चुका है। शास्त्रीय धारा एवं मनुस्मृति के आधार पर विशेष रूप से चार युग ही होते है। उन युगों के नाम हैं- पहला सतयुग, दूसरा त्रेतायुग, तीसरा द्वापरयुग और चौथा कलियुग है। इन चा…